स्वतंत्रता के नए आयाम
शोले के 50 सालः स्वर्ण जयंती वर्ष
शोले पहली भारतीय फ़िल्म थी जिसमें ‘स्टेरियोफोनिक सारंडट्रैक’ का उपयोग हुआ था। फ़िल्म का एक-एक किरदार निभाए प्रत्येक
कलाकार सब के सब यादगार बन गए। जैसे- मौसी जी, इमाम साहब, सांभ कालिया, सूरमा भोपाली,
और अंग्रेजों के जमाने के जेलर आदि। यहाँ तक कि विजू खोटे द्वारा निभाए गए कालिया
का संवादः
“सरदार, मैंने आपका नमक खाया है”
और गब्बर ने कहा- “अब गोली खा”।
अमज़द खान जिसने गब्बर सिंह की भूमिका फ़िल्म में अदा
की है। वे अपने किरदार के लिए खुद को तैयारी हेतु तरुण कुमार भादुरी की पुस्तक ‘अभिशप्त चंबल’ , से प्रेरित थे। अमज़द खान का
चुनाव सलीम-जावेद द्वारा दिल्ली में एक
अंतर-महाविद्यालय नाटक में उनके अभिनय को देखते हुए किया गया, जो डैनी डेन्जोंगपा
(जो गब्बर की भूमिका हेतु पहले चयनित थे) के बाद दूसरा चुनाव थे।
निर्देशक ‘रमेश सिप्पी’ ने फ़िल्म की शूटिंग अक्टूबर 1973 में शुरू की, जिसे पूरा होने में कुल दो
साल छः महीने लगे। सिर्फ 5 मिनट का गाना ‘ये दोस्ती शूट करने में कुल 21 दिन लगे। राधा के दीप जलाने वाले दो छोटे
दृश्यों को शूट करने में कुल 20 दिन लगे। ऐसे कई दिनों के सफर का परिणाम 1975 में
सामने आया। जिसे 198 मिनट लंबी फ़िल्म के रूप में रिलीज़ किया गया। जिसका मूल
निर्देशक संस्करण 1990 में 204 मिनट का रिलीज हुआ।
फ़िल्म विशेषज्ञों का मानना है कि शोले कि प्रेरणा
अकीरा कुरोसोवा की फ़िल्म 7 समुराई से (जिसमें एक गाँव के लोग फसल को लूटेरों से
बचाव हेतु 7 समुराई योद्धाओं की मदद लेते हैं। ) या सेर्जियो लियोन की
स्पेगेटी-वेस्टर्न फ़िल्म ‘वन्स अपॉन अ टाइम इन द वेस्ट’ से मानी जाती है।
निर्देशक के पिता जी. पी. सिप्पी ने फ़िल्म के शूटिंग
हेतु कर्नाटक में जमीन से एक पूरा गाँव
बसाया था- जो फ़िल्म में रामगढ़ बना। साथ ही सेट को बंगलुरु हाईवे से जोड़ने हेतु
सड़क भी बनवाई। जिसे अब ‘सिप्पी नगरम’ नाम से जाना जाता है।
फ़िल्म के कई साउंडट्रैक एवं संगीतों के निर्माण में
संगीत के जादूगर आर. डी. बर्मन का हाथ था। जिसने न केवल फ़िल्मी अंदाज को
प्रभावशाली बनाया बल्कि गब्बर की डरावनी भूमिका को भी अदा करने में भी बहुत मदद
की।
फ़िल्म के कई मार्मिक दृश्य बहुत प्रसिद्ध रहे। जैसे-
जब ठाकुर का परिवार मारा जाता है और उसका पोता, एकमात्र जीवित सदस्य, स्तब्ध खड़ा
होता है। ; जय का राज कि सिक्का उछालते वक्त हर समय निर्णय वही
लेता था, जो अंत में सामने आता है और उसने अपने दोस्त के लिए अपनी जान दे दी, जैसे कई दृश्य ।
नए आयाम
नवाचार करने की स्वतन्त्रता
नवाचार की खोज मानव जाति की अनोखी विशेषता रही है। पहिये के
आविष्कार से औद्योगिक क्रांति तथा डिजिटल युग तक सभी मानव नवाचार के ही परिणाम रहे
हैं।
पिंगल, ब्रह्मगुप्त, आर्यभट्ट और भास्कर जैसे विद्वानों ने गणित, ज्यामिति और
खगोल विज्ञान के क्षेत्र में क्रांति लाई। नालंदा, विक्रमशिला, वल्लभी, पुष्पगिरी
जैसे शिक्षा केंद्र एशिया भर से छात्रों और विचारकों को आकर्षित करते हुए
वास्तुकला, धातुकर्म, चिकित्सा, आयुर्वेद, भाषाविज्ञान आदि में ज्ञान प्रणाली का
पोषण करते रहे।
नवाचार हेतु-
रणनीतिक ढ़ाचें में बदलावः
नवाचार को बढ़ावा देने हेतु सरकारी नीतिगत बदलावों में केंद्रीय बजट 2025-2026 में महत्वपूर्ण विकास क्षेत्रों में अनुसंधान व विकास हेतु 20,000 करोड़ का आवण्टन। यह फण्ड हाल ही में SIDBI के अधीन जोड़े गए 10,000 करोड़ के डीप-टेक फंड ऑफ फंड्स (AOF) के पूरक के रूप में है। इसके अतिरिक्त 10,000 नए प्रधानमंत्री अनुसंधान फेलोशिप की घोषणा की गई है, जिसमें मासिक वजीफ़ा 70,000 से 80,000 रुपये तक है।
नियामकीय बदलावः
संस्थागत सुधार के रूप में
अनुसंधान राष्ट्रीय निधि राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF) की स्थापना की गई है। जो विज्ञान एवं
इंजीनियरिंग अनुसंधान बोर्ड (SERB) की जगह लेता है। ANRF का उद्देश्य 2023-28 के दौरान
50,000 करोड़ की राशि प्राप्त करना है, जो ANRF FUND, नवाचार फंड, विज्ञान एवं इंजीनियरिंग अनुसंधान फंड
और विशेष प्रयोजन फंड के रूप में होगी।
भारत के अनुसंधान और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को
मजबूत करने हेतु, प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केन्द्रीय कैबिनेट ने 01 जुलाई,
2025 को 1 लाख करोड़ की राशि के साथ अनुसंधान विकास और नवाचार योजना को मंजूरी दी
है। जिसका उद्देश्य निजी क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने हेतु दीर्घकालिक
वित्तपोषण या पुनर्वित्तपोषण प्रदान करना है, जो कम या शून्य ब्याज दरों पर हो।
जमीनी स्तर पर नवाचारः
राष्ट्रीय नवप्रवर्तन प्रतिष्ठान-
भारत (NIF), जो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के तहत एक
स्वायत्त संस्था है, लगभग 600 जिलों से खोजे गए ऐसे ज़मीनी तकनीकों और नवाचारों को
निरंतर पोषित कर रहा है।
इसके अतिरिक्त शिक्षा मंत्रालय द्वारा शुरू ‘उन्नत भारत अभियान’ शैक्षिणिक संस्थानों को ग्रामीण भारत से जोड़ता है।
नवाचार प्लेटफॉर्म के रूप में
डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचनाः
AADHAR, UPI, DIGILOCKER, ONDC (ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कामर्स)
जैसे डिजिटल अवसंरचना। ONDC छोटे व्यवसाय मालिकों को अमाजोन
या फ्लिपकार्ट जैसे बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के समान स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में
सक्षम बनाता है। 2025 तक, इस पर कुल 7 लाख से अधिक विक्रेता और सेवा प्रदाताओं को
जोड़ा गया हैं। जिस पर मार्च 2025 तक 20.4 करोड़ से अधिक संचयी लेनदेन संसाधित
किये गये हैं।
स्टेट ऑफ़ इंडिया डिजिटल इकोनॉमी रिपोर्ट 2024
अनुसार, भारत अब डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए विश्व में तीसरे स्थान पर है।
सरकार ने भारत उर्जा स्टैक (IES) भी लॉंच किया है, जो भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए यूपीआई जैसी एकीकृत,
सुरक्षित और इंटरऑपरेबल डिजिटल संरचना बनाने की दूरदर्शी पहल है।
नवाचार का क्षेत्रीय गहनीकरणः स्वास्थ्य, कृषि, एआई और क्वांटमः
स्वास्थ्य क्षेत्र में, डिजिटल-प्रथम दृष्टिकोण को
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के तहत मजबूत संस्थागत ढ़ाँचा निर्मित किया
जा रहा है, जिसमें वर्तमान में 70 करोड़
से अधिक (जिसमें 3.49 लाख स्वास्थ्य हेल्थ सुविधा रजिस्ट्री (एचएफआर) पर तथा 5.23
लाख स्वास्थ्य पेशेवर हेल्थकेयर प्रोफ़ेशनल रजिस्ट्री (एचपीआर) पर पंजीकृत)
आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाते निर्मित किये जा चुके हैं। इसके अलावा 5000 करोड़ के
बजट वाला फ़ार्मास्युटिकल रिसर्च इंसेटिव प्रोग्राम (पीआरआईपी) भारत को
फ़ार्मास्युटिकल और मेडटेक क्षेत्रों में एक वैश्विक अनुसंधान एवं विकास केंद्र
बनाने का लक्ष्य रखता है।
साथ ही, स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग और भारतीय
आयुर्विज्ञान अनुसंधान संस्थान परिषद् (डीएचआर- आईसीएमआर) का 2024-29 कार्य योजना का
प्रयास भारत में स्वदेशी और सस्ती स्वास्थ्य तकनीकों को बढ़ावा देना है।
कृषि क्षेत्र जो आज भारत के लगभग 42% कार्यबल को रोज़गार देने तथा राष्ट्रीय जीडीपी में
लगभग 18% योगदान देने
में सक्षम है। कृषि 4.0 को अपना रहा है। जिसमें कृषि क्रांति के रूप में उभरती
तकनीकों जैसे- ड्रोन, रिमोट सेसिंग, कीट पहचान हेतु एआई और मृदा व जल प्रबंधन हेतु
आईओटी के संयोजन आदि शामिल हैं। कृषि में नवाचार हेतु कई कृषि कार्यक्रम जैसे-
कृषि-भारत हैकथॉन, युवाओं को कृषि में आकर्षित और बनाये रखने की योजना (एआवाईए),
राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेबीवाई-रफ्तार) और एग्री-टेक इनोवेशन हब कई
एग्री-स्टार्टअप को पोषित कर रहे हैं। जिससे एआई संचालित सिंचाई सलाहकार उपकरण,
मिट्टी परीक्षण के लिए मोबाइल लैब और रासायनिक उर्वरकों के वैकल्पिक जैविक इनपुट
विकास में सहायता मिली है।
अटल इनक्यूबेशन केन्द्र (एआईसी) और सामुदायिक नवाचार
केंद्र (सीआईसी) टियर II और टियर III क्षेत्रों में बढ़ावा दिया जा रहा है। एटीएल(अटल टिंकरिंग लैब्स) योजना के
तहत अंतर्विषयक साइबर-भौतिक प्रणालियों (NM-ICPS) व राष्ट्रीय क्वाण्टम मिशन की सहायता से व्यापक व समन्वित नवचार ढ़ाँचे को
प्रोत्साहन दिया जा रहा है। जिसमें हजारों स्कूलों को 3डी प्रिंटर, रोबोटिक्स किट
और विज्ञान उपकरण प्रदान किया जाना आदि शामिल हैं।
मापन योग्य वैश्विक प्रभावः
वैश्विक नवाचार सूचकांक 2024 में भारत का 39वां स्थान
रहा, जो 2025 में बढ़कर 38वाँ हो गया, भारत के नवाचार प्रगति का सूचक है। विश्व
बौद्धिक संपदा संगठन द्वारा जारी वर्ल्ड आईपी फाइलिंग रिपोर्ट 2023 में भारत ने
पेटेंट फाइलिंग में विश्व स्तर पर 6ठाँ स्थान हासिल किया है। नेटवरक रेडीनेस
इण्डेक्स में भारत की स्थिति 2015 में 89वें स्थान से बढ़कर 2024 में 49वाँ हो गई।
इसमें 1.59 लाख से अधिक डीपीआईआईटी-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स, 100 से अधिक
यूनिकॉर्न्स और टियर 2 और टियर 3 शहरों से 51% तक की मजबूत स्टार्टअप्स भागीदारी के साथ, भारत विश्व में तीसरा सबसे बड़ा
स्टार्टअप इकोसिस्टम है। जो भारत पेटेंट कानून में कड़े प्रवर्तन व नियामक
अनिश्चितताओं के समापन के पश्चात् प्राप्त सफलता को दर्शाती हैं।
जन-जन का ‘पद्म’
श्री पंडी राम मंडावी- 12 फरवरी, 1957 को गरबेगाल गाँव में (छत्तीसगढ़ के नारायपुर) जन्में
श्री मंडावीजी प्रसिद्ध जनजातीय वाद्य यंत्र निर्माता व ‘मुरिया’ लकड़ी की शिल्पकारी में पारंगत हैं। इन्हें ‘गोंड लकड़ी शिल्प’ की संवृद्धि और प्रतिष्ठित बांसुरी
‘सुलुर’ या ‘बस्तर फ्लूट’ के निर्माण हेतु पद्म श्री से
नवाजा गया।
डॉ. वेंकप्पा अंबाजी सुगतेकर- 1 मई, 1943 को जन्में बागलकोट, कर्नाटक के गोधल्ली
लोक गायक सुगतेकरजी को गोंधल्ल लोक-संगीत की समृद्ध विरासत को संरक्षित व प्रचारित
करने हेतु पद्म श्री से नवाजा गया। प्रधानमंत्री ने उन्हें ‘संस्कृति के अग्रदूत’ की संज्ञा दी। उन्हें 30 से भी
अधिक पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।
वाचस्पति डॉ. वी. आर. पंचमुखी (आंध्र प्रदेश)- साहित्य एवं शिक्षा (अर्थशास्त्र
व संस्कृत दोनों की विशेषज्ञता, संस्कृत और इंडोलॉजी के निपुण विद्वान) के क्षेत्र
में पद्म श्री से सम्मानित।
श्री फ़ारुख अहमद मीर (जम्मू-कश्मीर)- प्रसिद्ध कश्मीरी शॉल बुनकर,
जिन्होंने कानी बुनाई में हिंदी, उर्दू और संस्कृत कैलीग्राफी को अपनाया, को कला
के क्षेत्र में पद्म श्री से सम्मानित।
आतंकवाद के विरुद्ध भारत का युद्ध
22 अप्रैल, 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम क्षेत्र
की बैसरन घाटी में नागरिकों पर हुए जघन्य आतंकी हमले ने एक बार फिर से सीमा पार
आतंकवाद की समस्या को उजागर किया है। जिसका भारत चार दशकों से अधिक समय से भारत
सामना कर रहा है।
सैन्य कार्रवाई के तौर पर बल प्रयोग-
पहलगाम हमले के जवाब में ऑपरेशन सिंदूर के रूप में
कार्रवाई की गई। जिसमें पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में लश्कर-ए-तैयबा (LET), जैश-ए-मोहम्मद (JEM) और हिजबुल मुजाहिद्दीन से जुड़े
आतंकी ठिकानों पर हमला किया गया। 1971 के युद्ध के बाद पाकिस्तान के अंदर शुरू
किया गया भारत का सबसे गहन सैन्य अभियान है।
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में जैश-ए-मोहम्मद के
ठिकानों पर 2019 में किए गए बालाकोट हवाई हमले और नियंत्रण रेखा (LOC) के पार 2016 में किए गए सर्जिकल स्ट्राइक ऑपरेशन सिंदूर के पूर्वगामी आतंकी
प्रतिक्रिया कार्रवाईयाँ रही हैं, जो पुलवामा आत्मघाती हमले और उरी हमले के
प्रतिक्रयाँ स्वरूप की गई थीं। म्यांमार में विद्रोहियों के खिलाफ 2015 के ‘ऑपरेशन हॉट परस्यूट’ में भी इसी तरह आतंकी प्रतिक्रिया
हेतु स्पष्ट विज़न था।
साथ ही प्रधानमंत्री ने सिंधु जल संधि को स्थगित कर
यह स्पष्ट कर दिया कि ‘पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते’।
संस्थागत क्षमता की मजबूती-
सैन्य कार्रवाई के अलावा भारत ने पिछले 15 वर्षों में
‘आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता’ की नीति अपनाई है। भारत में कई सुधार 2008 में हुए मुंबई आतंकी हमले के बाद
शुरू हुए। बहु-एजेंसी केन्द्र और सहायक बह-एजेंसी केन्द्र सुरक्षा और खुफिया
एजेंसियों के लिए 2009 में सरकार ने राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) की स्थापना की।
मनी लॉण्ड्रिंग और आतंकी वित्तपोषण गतिविधियों से
निपटने हेतु पेरिस स्थित वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (FATF) के सदस्य के रूप में भारत ने नवंबर, 2004 में वित्तीय खुफिया इकाई (FIU-INDIA) की स्थापना की। इसके अलावा धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 का 2009 में संशोधन
किया गया। पीएमएलए संशोधन नियम, 2023 के तहत लाभार्थी स्वामियों की पहचान की सीमा
को 25% से 10% कर दिया गया, साथ ही उचित परिश्रम
मानदंडों का विस्तार, सीए और सीएस जैसे पेशेवरों को भी शामिल करना तथा क्रिप्टो
लेनदेन को भी इसमें शामिल करना आदि शामिल किया गया। राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण
(संशोधन) अधिनियम, 2019 ने अंतर्राष्ट्रीय संधियों के अधीन, भारत के बाह्य कृत
अपराधों को भी एनआईए के दायरे में ला दिया।
कश्मीर में आतंकवाद पर लगामः
2022-23 के बीच, जम्मू-कश्मीर पुलिस ने केंद्र शासित प्रदेश नार्को-आतंकवाद के 26
मामले दर्ज किये। जिनमें से 17 में लश्कर-ए-तैयबा शामिल था। हाल ही में 30 सिंतबर
2026 को LeT के कमांडर हाशिम मूसा को भारतीय सुरक्षा बलों ने मार
गिराया।
सीमा पार आतंकी सुरक्षा हेतु उपायों में एलओसी और
अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर कंटीले तारों की बाड़ लगाई गई, घुसपैठ रोध बाधा प्रणाली की
तैनाती, अनधिकृत घुसपैठ की जानकारी हेतु टोही, ड्रोन, थर्मल इमेजिंग उपकरणों का
उपयोग के माध्यम से निगरानी को मजबूत किया गया है।
राजनीतिक साझेदारों का सहयोगः
2022 में नई दिल्ली में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा
परिषद् की आतंकवाद की रोकथाम समिति की विशेष बैठक और 90वी इंटरपोल महासभा की भारत
ने मेजबानी की।
नवंबर, 2022 में तीसरे मंत्रिस्तरीय ‘आतंकवाद के लिए धन नहीं’ सम्मेलन के दौरान भारत ने क्रिप्टोकरेंसी
के इस्तेमाल सहित आतंकी वित्तपोषण के आधुनिक साधनों से निपटने की आवश्यकता पर
प्रकाश डाला।
अक्टूबर, 2022 में सुरक्षा परिषद् की आतंकवाद विरोधी
बैठक के अंत में दिल्ली घोषणापत्र में ड्रोन तकनीक, आतंकवादी वित्तपोषण व आतंकवादी
संगठनों द्वारा सूचना व संचार तकनीक के उपयोग पर ध्यान केंद्रित किया।
2008 में मुंबई आतंकी हमलावर संदिग्ध तहव्वुर हुसैन राणा का हाल ही में अमेरिका से भारत प्रत्यर्पण द्विपक्षीय आतंक विरोधी सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण है।
सीमा पार आतंकवाद गतिविधियों में कुछ वर्षों में
बदलाव आया है किंतु कई वर्षों तक बड़े जन-हानि वाले आतंकी हमले जैसे- 2005 के
दिल्ली सीरियल बल विस्फोट, 2006 के मुंबई ट्रेन बम विस्फोट और 2008 का मुंबई हमले,
आतंकी संगठनों हेतु आम बात थी फिर सीमावर्ती आतंकी हमले शुरू हुए जैसे- गुरुदासपुर(2015),
पठानकोट(2016), उरी(2016) और पुलवामा(2019) की घटनाएँ। बदलती भू-राजनीतिक गतिशीलता
और राष्ट्रों की बदलती प्राथमिकताओं के बीच आतंकवाद का उन्मूलन एक सतत् संघर्ष है।
जिससे सामना करने हेतु मजबूत क्षमता बनाये रखने की आवश्यकता है।
अच्छे स्वास्थ्य की स्वतंत्रता
स्वास्थ्य के क्षेत्र में आयुष्मान भारत वित्तीय
सुरक्षा, डिजिटल सशक्तीकरण और अवसंरचनात्मक सुधार का समायोजन एक सुसंगत एकल मिशन
के रूप में करता है। इसके चार स्तम्भ हैं- आयुष्मान भारत आरोग्य मंदिर (AAM), आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB PM-JAY), आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) और प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत
स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (PM-ABHIM) । जिनका उद्देश्य सार्वभौमिक
स्वास्थ्य कवरेज (UHC) प्राप्त करना है।
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना(AB PM-JAY)-
सुनिश्चित करता है कि आर्थिक रूप
से कमजोर परिवार अस्पताल में भर्ती होने की दशा में गरीबी की ओर न धकेले जाएं।
2018 में भारत सरकार ने सबसे बड़ी सार्वजनिक रूप से वित्त पोषित स्वास्थ्य बीमा
योजना AB PM-JAY शुरू की। जिसके तहत आर्थिक रूप से
कमजोर वर्गों को अस्पताल में भर्ती के लिए प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपये का
मुफ्त उपचार लाभ मिलता है। 2018 में पहला आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्थापित किया गया।
जिसका उद्देश्य मातृ एवं शिशु देखभाल से परे गैर-संचारी रोग प्रबंधन, उपशामन
देखभाल और मुफ्त आवश्यक दवाएँ और नैदानिक सेवाएँ प्रदान करना था।
जून, 2025 तक PM-JAY के तहत नौ करोड़ से ज्यादा अस्पताल में भर्तियाँ हुई जिन पर एक लाख करोड़
रुपये से अधिक की स्वास्थ्य सेवा लागत आई। योजना के अंतर्गत लोग 32,000 से ज्यादा
सरकारी और निजी अस्पतालों में इलाज की सुविधा प्राप्त कर सकेंगे, जिनमें से 46% निजी अस्पताल हैं।
2022 में संशोधित स्वास्थ्य लाभ पैकेज 27 चिकित्सा
विशेषज्ञताओं से 1961 स्वास्थ्य लाभ पैकेजों की पेशकश करता है। योजना के गुणवत्ता
प्रमाणन कार्यक्रम के तहत लगभग 400 सूचीबद्ध अस्पताल का संरचित ऑडिट किया गया है।
PM-JAY के तहत अस्पताल में भर्ती होने वाले लोगों में से लगभग आधी संख्या महिलाओं की
है। 2023 में राष्ट्रीय प्राधिकरण ने PM-JAY के कवरेज को ट्रांसजेंडर समुदाय
तक बढ़ा दिया गया।
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) - गारण्टी देता है कि नागरिकों का स्वास्थ्य डेटा सुरक्षित, पोर्टेबल और सशक्त
हो।
तीन रजिस्ट्रियाँ ABDM के लिए एक मजबूत नींव प्रदान करती हैं। आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता आभा (ABHA) एक 14 अंकीय विशिष्ट स्वास्थ्य पहचान पत्र है जो पूरे देश में किसी व्यक्ति
के डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड तक पहुँच हेतु सक्षम बनाता है। स्वास्थ्य सुविधा
रजिस्ट्री (HPR) सभी चिकित्सा
प्रणालियों में लाइसेंस प्राप्त चिकित्सकों की एक सत्यापित सूची है। स्वास्थ्य
सुविधा रजिस्ट्री (HFR) सभी सार्वजनिक व निजी अस्पतालों,
क्लीनिकों, प्रयोगशालाओं और नैदानिक केंद्रों की सत्यता का एकमात्र स्त्रोत प्रदान
करता है।
ये रजिस्ट्रियाँ तीन डिजिटल गेटवे के माध्यम से जुड़ी
हैं। -
1. स्वास्थ्य सूचना विनिमय- सहमति प्रबंधक (HIE-CM) रोगियों को एक निश्चित अवधि हेतु विशेष डॉक्टरों के साथ स्वास्थ्य रिकॉर्ड साझाकरण
की अनुमति देता है।
2. एकीकृत स्वास्थ्य इंटरफेस(UHI) यूपीआई मॉडल पर आधारित नागरिकों को स्वास्थ्य सेवाओं की विस्तृत श्रृंखला
हेतु प्रदाताओं से जोड़ता है। जैसे- ब्लड बैंक तक पहुँच, टेली-परामर्श बुकिंग,
डायग्नोस्टिक्स लैब्स या स्वास्थ्य सेवाएँ प्राप्त करना।
3. राष्ट्रीय स्वास्थ्य दावा एक्सचेंज (NHCX) एक एकीकृत नेटवर्क, जो अस्पतालों और भुगतानकर्त्ताओं के बीच बीमा दावों के
पारदर्शी और कागज रहित निपटान में सहायता करता है।
2025 के मध्य तक 79 करोड़ से अधिक आभा कार्ड जारी
किये जा चुके हैं और 6.5 लाख से अधिक स्वास्थ्य सेवा पेशेवर स्वास्थ्य सुविधा
रजिस्ट्री से पंजीकृत हो चुके हैं।
आयुष्मान भारत आरोग्य मंदिर योजना
(AAM) एवं प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना
मिशन (PM-ABHIM) - दूरदराज स्थित स्वास्थ्य
उपकेंद्रों से लेकर अत्याधुनिक नैदानिक
प्रयोगशालाओँ तक बड़े पैमाने पर सेवाएँ प्रदान करने के लिए आवश्यक सार्वजनिक
स्वास्थ्य अवसंरचना का निर्माण करते हैं। आरोग्य मंदिरों के माध्यम से उप-स्वास्थ्य केन्द्रों (SHC) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) को मजबूत कर व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा देना है।
भारत के डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र की
तकनीकी संरचना को परिभाषित करने के लिए जुलाई, 2018 में राष्ट्रीय स्वास्थ्य स्टैक
जारी किया था। इसके बाद दिसम्बर 2019 में राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य ब्लूप्रिंट
जारी किया गया, जिसने स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण के लिए एक संघीय,
गोपनीयता-संरक्षण प्रणाली के सिंद्धांतों को निर्धारित किया। इसके आधार पर अगस्त,
2020 में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन की घोषणा पॉयलट प्रोजेक्ट के रूप में की गई।
सितम्बर, 2021 में इसकी आधिकारिक रूप से राष्ट्रव्यापी शुभारंभ किया गया।
2025 तक PM-JAY के तहत 41 करोड़ से अधिक
लाभार्थियों को आयुष्मान कार्ड जारी किये गये है, ABDM के तहत 61 करोड़ से अधिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड डिजिटल रूप से जोड़े गये और 1.7
लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर सामुदायिक स्तर पर निवारक, प्रोत्साहक और
आवश्यक उपचारात्मक देखरेख प्रदान कर रहे है।
नवाचारः स्कैन और शेयर से माइक्रोसॉफ्ट तक-
स्कैन एंड शेयर सुविधा मरीजों को किसी स्वास्थ्य
सुविधा केंद्र में एक क्युआर कोड स्कैन करने और ओपीडी पंजीकरण हेतु तुरंत अपने आभा
लिंक्ड जनसांख्यिकी विवरण साझा करने की सुविधा देता है। 21000 से ज्यादा स्वास्थ्य
सुविधाओं ने 12 करोड़ से ज्यादा ऐसे टोकन जारी किये जा चुके हैं, जिससे मरीजो और
प्रशासकों दोनों के लगभग 6 करोड़ मानव-घण्टे की बचत हुई है।
121 से ज्यादा विशेष भौगोलिक विशेषता वाले
उच्च-केंद्रित भौगोलिक क्षेत्रों (जिन्हे माइक्रोसाइट कहा जाता है।) में राज्य
सरकारें और समर्पित क्षेत्रीय टीमें छोटे निजी क्लीनिकों, डायग्नोस्टिकों केंद्रों
और फॉर्मेसियों को 100 माइक्रोसाइट परियोजना के तहत ABDM में शामिल होने में सहायता कर रही है। जिसमें 54,000 से ज्यादा स्वास्थ्य
केंद्रों और लगभग 68,000 स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों को सफलतापूर्वक स्थानीय भ्रमण कर
शामिल किया गया है।
किसानों का सशक्तीकरण
भारतीय कृषि क्षेत्र देश के सकल मूल्यवर्धन में 18% ,कार्यबल में 46% का योगदानकर्त्ता है। 2022-23 में
भारत के कुल भूमि में सकल निवल क्षेत्र 14.07 लाख हेक्टेयर, सकल फसल क्षेत्र 2193
लाख हेक्येयर, जिसमें फसल सघनता 155.9% थी तथा सिंचित क्षेत्र 793.12 लाख
हेक्टेयर (56.37% था। पिछले दशक में कृषि क्षेत्र
ने औसतन 5% की वृद्धि की है। (आर्थिक सर्वेक्षण-2024)
तीसरे अग्रिम अनुमानों के अनुसार, वर्ष 2024-25 में,
भारत ने 353.96 मीट्रिक टन खाद्यान्न का रिकॉर्ड उत्पादन (जो पिछले वर्ष की तुलना
में 6.5% अधिक है), 426.09 लाख टन तिलहन उत्पादन (पिछले वर्ष
से 7.4% अधिक) हासिल किया। बागवानी क्षेत्र द्वितीय अग्रिम
अनुसार 367.72 मिलियन टन उत्पादन कर खाद्यान्न उत्पादन से भी आगे निकल गया।
दलहन उत्पादन 2014-15 के 17.15 मिलियन टन से बढ़कर
2017-18 में 25.41 मिलियन टन हो गया।
किसान सशक्तीकरण हेतु सरकार ने डिजिटल कृषि मिशन शुरू
किया है। मिशन में डिजिटल सार्वजनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर(DPI) या एग्री स्टैक शामिल है, जिसमें तीन रजिस्ट्रियाँ हैं-
1. जियो-रिफरेंस्ड रजिस्ट्री
भू-स्वामियों से जुड़ी हुई हो।
2. सभी भूमि मालिक किसानों को किसान
आईडी सहित किसान रजिस्ट्री।
3. सभी कृषि भू संदर्भ भूखंडों का डिजिटल फसल सर्वेक्षण।
किसान पहचान पत्र ( FARMER ID) एक विशिष्ट पहचान पत्र है जो प्रत्येक भूमि स्वामी किसान को प्रदान किया जाता
है। जिसमें भूखंड संख्या, भूखंड का क्षेत्रफल, भूखंड में किसान का हिस्सा, बोई गई
फसल, किसान का मोबाइल नंबर और अन्य जनसांख्यिकीय जानकारियाँ शामिल होती हैं। मिशन
के आरंभ से 30 जून, 2025 तक, 6.5 करोड़ से अधिक किसान आईडी जारी की चुकी हैं।
स्वतंत्रता के लिए दृढ़ संकल्प
18वीं सदी में भारत अपनी लोहे और इस्पात की कारीगरी
के लिए प्रसिद्ध था। गोलकुंडा, मैसूर, ग्वालियर, तंजौर, लाहौर, आगरा, जयपुर और अमृतसर
जैसे कई लोहे और इस्पात बनाने के केंद्र थे। उच्च गुणवत्ता वाले इस्पात जिन्हें
आमतौर पर वुट्ज इस्पात कहा जाता था, चारकोल-आधारित लोहे से निर्मित होते थे।
टीपू सुल्तान की प्रसिद्ध तलवार, जो इसी इस्पात की
बनी थी तथा जिसकी धार घुमावदार थी का उपयोग 1799ई. में ब्रिटिश सेना का सामना करने
हेतु किया गया। 1780ई. में आंग्ल-मैसूर युद्ध के दौरान टीपू सुल्तान और हैदर अली
ने लोहे के खोल वाले स्वदेशी भारतीय रॉकेटों का उपयोग किया गया। ये रॉकेट पहले
ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा देखे गए रॉकेटों से कहीं अधिक उन्नत थे, मुख्यतः
इसलिए क्योंकि इनमें प्रणोदक को रखने के लिए लोहे की नलिकाओं का प्रयोग किया गया
था।
1815ई. में बंगाल में रानीगंज कोयला क्षेत्र की खोज
के साथ, भारत में बड़े पैमाने पर कोक-ईधन वाले लोहे के कारखानों की संभावनाएँ
उत्पन्न हुईं। 1903-04 में ओडिशा में समृद्ध हेमाटाइट की खोज हुई। 1905ई. में
वाणिज्य एवं उद्योग विभाग ने भारतीय इस्पात कंपनियों से 10 वर्षों हेतु प्रति वर्ष
20 हजार टन इस्पात रेल खरीदने का अनुबंध किया। जिनमें से पहला भारतीय इस्पात
सयंत्र 1908 में जमशेदपुर में स्थापित हुआ, जिसने 1912 में पहला इस्पात इन्गॉट
निकाला। 1914-18 के दौरान रेलवे व हथियारों की माँग में वृद्धि के कारण इस्पात माँग
बढ़ी। 1925 के ‘काकोरी ट्रेन डकैती’ और 1930 के ‘चिट्टागोंग (चटगाँव) हथियार डकैती’ में इस्पात से बने पिस्तौल व बंदूकें इस्तेमाल की गई।
1900 के बाद भारतीय इस्पात उत्पादन आर्थिक व राजनीतिक
परिस्थितियों से प्रभावित रहा। जिसमें शामिल था-
1. भारतीय इस्पात कंपनियों की
स्थापना,
2. 1930 के दशक की शुरुआत में विश्व
बाजारों में मंदी,
3. 1914-18 तथा 1939-45 के दो
महायुद्ध।
1947 तक एक छोटा व टिकाऊ इस्पात उद्योग था।
स्वतंत्रता के समय 10 लाख टन क्षमता से शुरू भारत का इस्पात उत्पादन के सफर ने
वर्तमान में इसे विश्व की दूसरा सबसे बड़ा कच्चा इस्पात उत्पादक बना दिया, जो अभी
भी जारी है।
विश्व संस्कृत दिवस
भारतीय संस्कृति और चेतना का उत्सव
संस्कृत दिवस मनाने का शुभारंभ भारत सरकार द्वारा
1969 से किया गया। शिक्षा मंत्रालय के निर्देशानुसार यह प्रतिवर्ष श्रावण पूर्णिमा
को मनाया जाता है।
वैज्ञानिक और तार्किक दृष्टिकोण
संस्कृत भाषा का प्रथम व्यवस्थित व्याकरणीय ग्रन्थ पाणिनि की ‘अष्टाध्यायी’ को माना जाता है। जिसकी 3959 सूत्रों वाली प्रणाली आज भी कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग में संदर्भ के रूप में देखी जाती है। पिंगलाचार्य ने ‘छंदशास्त्र’ में बाईनरी कोड और मेट्रिक्स (Binary Numeral system and combinatorix) की संकल्पना दी थी जिसे आधुनिक कम्प्यूटर विज्ञान की नींव माना जाता है। आर्यभट्ट के कई गणितीय (जैसे- शून्य व दशमलव की खोज, पाई का मान) तथा खगोलिकी (जैसे- पृथ्वी की त्रिज्या, घूर्णन गति, ग्रहण के कारण व त्रिकोणमिति के सिद्धांत) खोजे; भास्कराचार्य की ‘लीलावती’ में बीजगणित, क्षेत्रमिति और भिन्नों का व्यवस्थित वर्णन तथा वराहमिहिर की ‘वृहत्संहिता’ में खगोल, मौसम, भूगर्भ , रत्न और वास्तु शास्त्र पर विस्तृत चर्चा विज्ञान के क्षेत्र में संस्कृत के योगदान को दर्शाती हैं।
नैतिकता व संस्कृति में संस्कृत
‘वसुधैव कुटुम्बकम’ (उपनिषद्) - भारत के विश्वबन्धुत्व एवं समावेशिता;
‘संगच्छध्वम् संवदध्वम्’ (ऋग्वेद) अर्थात् साथ मिलकर चलें, साथ मिलकर बोले- सामाजिक
एकता और नैतिक मूल्यों की स्थापना;
‘सत्यं वदं, धर्मं चर’ (तैत्तरीय उपनिषद्)- नैतिक जीवन की दिशा का निर्धारण;
‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ – सार्वभौमिक कल्याण और स्वास्थ्य की कामना और
‘माता भूमिः पुत्रोअहं पृथिव्या’ (अथर्ववेद) – प्राकृतिक संसाधनों के प्रति गहरे सम्मान और
सह-अस्तित्व का दर्शन आदि भारतीय संस्कृति व नैतिकता में सबसे पुरातन और सशक्त
उदाहरण हैं।
वैश्विक पटल पर संस्कृत का प्रभाव
ऑक्सफोर्ड, हार्वर्ड, कैम्ब्रिज, कोलंबिया, टोक्यो,
और हेडलबर्ग जैसे संस्थान संस्कृत के महत्व को पहचानते हुए इसे अपने पाठ्यक्रमों
का अभिन्न अंग बना रहे हैं। इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ़ संस्कृत स्टडीज़ (IASS) द्वारा हर तीन वर्ष में एक बार आयोजित होने वाली ‘वर्ल्ड-संस्कृत कॉन्फ्रेंस’ जैसी संगोष्ठियाँ संस्कृत के
प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। जून, 2025 में काठमाण्डू में
आयोजित सम्मेलन में भारत, यूरोप, अमेरिका सहित कई देशों के विद्वानों,
शोधकर्त्ताओं और संस्कृतज्ञों ने भाग लिया।
आधुनिक पीढ़ी और संस्कृत
आज की युवा पीढ़ी को संस्कृत से जोड़ने के लिए इसे
संवाद और नवाचार की जीवंत भाषा बनाना आवश्यक है। इस दिशा में संस्कृत भारती जैसे
संगठन ‘संवाद शिविर’ और ‘स्पोकन संस्कृत’ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से इसे जन-जन पहुँचाने का कार्य कर रहे हैं।
डिजिटल युग में संस्कृत दिवस का
उत्सव
आधुनिक तकनीक ने संस्कृत को नई पीढ़ी के करीब लाने
में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। डिजिटल लाइब्रेरी, मोबाइल एप्लीकेशन जैसे- लिटिल
गुरु, शास्त्रार्थ, देववाणी (देववाणी ऐप) आदि विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म संस्कृत
ग्रंथों, शब्दकोशों और सीखने की सामग्री को आसानी से उपलब्ध करा रहे हैं।
संस्कृत का पुनरुद्धार, भारत की पुनर्कल्पना राष्ट्रीय
शिक्षा योजना 2020 की अंतर्दृष्टि
“प्राचीन एवं शाश्वत भारतीय ज्ञान और सोच की समृद्ध धरोहर हमारी इस नीति का
पथप्रदर्शक रही है।”
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के विचार-
भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में इसे प्रमुख
आधुनिक भाषा बताया गया है और कहा गया है कि इसका विशद् प्राचीन साहित्य है जो आकार
में लैटिन और यूनानी भाषाओं के संयुक्त साहित्य से भी कहीं ज्यादा विस्तृत है तथा
इसमें गणनाशास्त्र, दशर्नशास्त्र, व्याकरण, संगीत, काव्य, औषधि एवं चिकित्सा,
वास्तुशिल्प, धातुशिल्प, नाट्यशास्त्र, कविता एवं कथा शास्त्र सम्मिलित हैं (
जिन्हें ‘संस्कृत ज्ञान प्रणालियों’ के रूप में जाना जाता है।) और इस व्यापक ज्ञान को संजोने में विभिन्न
धर्मावलम्बी लोगों तथा जीवन के सभी क्षेत्रों के विभिन्न लोगों का हजारों वर्ष का
महती योगदान रहा है।
ज्ञान(जानकारी), प्रज्ञा(बुद्धिमत्ता) और सत्य(वास्तविकता) को सदा ही भारतीय विचार और दर्शन में सर्वोच्च मानव लक्ष्य माना जाता है।
नवगठित त्रिभाषा नीति में संस्कृत को भी बनाना बहुत
महत्वपूर्ण पहल है क्योंकि इसके अंतर्गत संस्कृत को अन्य भारतीय एवं विदेशी भाषाओं
के समकक्ष दर्जा मिल गया है।











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